झारखंड में कोदरमा की एक अदालत ने पुलिस को पत्रकार निरुपमा पाठक की संदेहास्पद स्थिति में हुई मौत के मामले में उनके पुरुष मित्र प्रियाभान्शु रंजन के खिलाफ बलात्कार और यौन शोषण के मुकदमे दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.
कोडरमा के मुख्य दंडाधिकारी एमके अग्रवाल ने ये निर्देश निरुपमा की मां की अर्ज़ी पर दिए हैं. निरुपमा की मां सुधा पाठक फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में है.
अदालत ने सुधा पाठक को नौ मई से 11 मई तक पैरोल पर रिहा करने का भी आदेश दिया ताकि वो अपनी बेटी के श्राद्ध-कर्म में भाग ले सकें.
अदालत ने प्रियभांशु के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 376 (बलात्कार) और 306 (मौत के लिए मजबूर करना) सहित अन्य धाराओं के अंतर्गत मुक़दमा दर्ज करने के लिए निर्देश दिए हैं.
निरुपमा की मां सुधा ने आरोप लगाया है कि प्रियभांशु ने उनकी बेटी को शादी के नाम पर फुसलाकर यौन शोषण किया.
तेईस वर्षीया पत्रकार निरुपमा पाठक दिल्ली के एक समाचार पत्र में काम करतीं थीं. उन्हें 29 अप्रैल को झारखंड में उनके कोडरमा स्थित निवास में मृत पाया गया था. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार निरुपमा की मौत दम घोंटे जाने से हुई है.
'मजबूर किया गया'
अपनी अर्ज़ी में सुधा ने दावा किया है कि निरुपमा अपनी मौत के समय तीन महीने की गर्भवती थीं और जब प्रियभांशु ने शादी करने से मना कर दिया तो उनकी बेटी ने सामाजिक डर के कारण अपनी जान दे दी.
प्रियभांशु फ़िलहाल दिल्ली में रह रहे हैं और झारखंड पुलिस ने उनसे पूछताछ की है.
इस मामले में पुलिस ने मौत की परिस्थितियों को जानने के लिए निरुपमा के पिता और भाई से भी पूछताछ की है. पुलिस को इस बात का भी संदेह है कि निरुपमा को 'इज़्ज़त के नाम' पर क़त्ल किया गया.
निरुपमा के परिवार वालों का कहना है कि उसने आत्महत्या की है, लेकिन पोस्टमार्टेम रिपोर्ट के अनुसार निरुपमा का गला घोंटा गया.
हालांकि परिवार वालों ने इस बात को स्वीकार किया है कि वे निरुपमा की प्रियाभांशु से शादी के ख़िलाफ़ थे.
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